राजस्थान से चलेगी आठ कोच वाली मिनी वंदे भारत:1 घंटे के सफर का टिकट 400 से 800 रुपए, आज जोधपुर से रवाना होगी
जोधपुर (जगमाल सिंह राजपुरोहित) |
राजस्थान से दूसरी वंदेभारत ट्रेन की शुरुआत शुक्रवार से हो रही है। पीएम मोदी दिल्ली से वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर इसे जोधपुर जंक्शन से साबरमती के लिए रवाना करेंगे।
लेकिन, इस ट्रेन की खास बात ये है कि ये देश की सबसे छोटी वंदे भारत ट्रेन में शामिल है। यानी जयपुर समेत दूसरे राज्यों में दौड़ने वाली वंदे भारत में 16 कोच है लेकिन इस ट्रेन में 8 कोच ही होंगे।
शुक्रवार को ये ट्रेन दोपहर 3.30 बजे वंदेभारत जोधपुर जंक्शन से साबरमती के लिए रवाना होगी।
इसके बाद 9 जून से ट्रेन रेगुलर चलेगी। मंगलवार को छोड़कर सप्ताह के 6 दिन वंदे भारत जोधपुर मुख्य स्टेशन से रवाना होकर गुजरात के साबरमती पहुंचेगी।
वहीं इसके किराया की बात की जाए तो ये भी तय हो चुका है, लेकिन यदि इस ट्रेन से कोई जोधपुर से पाली 72 किलोमीटर का सफर तय करेगा तो उसे 400 से 800 रुपए चुकाने होंगे।
इसके तहत चेयर कार का किराया जोधपुर से पाली के लिए 425 और एग्जीक्यूटिव कैटेगरी के लिए 815 रुपए देने होंगे।
दोनों ट्रेनों 12461 व 12462 की फेयर लिस्ट
कैटरिंग की सुविधा भी मिलेगी, साबरमती तक 1900 से 2100 रुपए देने होंगे
वंदे भारत में दो कैटेगरी होगी जिसमें चेयर कार व एग्जीक्यूटिव क्लास रहेगी। एग्जीक्यूटिव क्लास का चेयर कार से किराया ज्यादा रहेगा। वहीं, ट्रेन में कैटरिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। यात्री अगर खाना भी ऑर्डर करते हैं तो उसका चार्ज फेयर चार्ज में एड हो जाएगा।
जोधपुर से आबू रोड 269 किलोमीटर की दूरी वंदे भारत से 1420 व 720 रहेगी। कैटरिंग के साथ यह किराया बढकर 1575 व 845 रुपए होगा।
इसी तरह जोधपुर से साबरमती के बीच 449 किलोमीटर की दूरी 1975 और 995 रुपए व कैटरिंग के साथ 2130 व 1115 रहेगा।
वंदे भारत में किराया ज्यादा
जोधपुर से अहमदाबाद के लिए अभी जो गाड़ियां चल रही है उसमें थर्ड एसी में करीब 700 से 800 रुपए तक का किराया है।
वंदे भारत इन गाड़ियों से दो घंटे पहले पहुंचाएगी। ऐसे में जिन यात्रियों को जल्दी अहमदाबाद पहुंचना है व वापस लौटकर जोधपुर आना है उनके लिए वंदे भारत अच्छा ऑप्शन रहेगा।
यानी अहमादाबाद में तीन से चार घंटे का काम निबटा कर जोधपुर लौट सकते हैं।
वहीं, जोधपुर से अहमदाबाद रुट पर चलने वाली अन्य ट्रेनों की तुलना करें तो सूर्यनगरी शाम को साढे़ सात बजे जोधपुर से निकलती है जो देर रात एक बजे अहमदाबाद पहुंचाती है।
जैसलमेर-साबरमती रात काे जोधपुर से साढे़ आठ नौ बजे निकलती है वह सुबह साढे़ पांच बजे के करीब अहमदाबाद पहुंचाती है।
जम्मूतवी सुबह 6 बजे जोधपुर से निकलती है और दोपहर डेढ़ बजे अहमदाबाद पहुंचाती है। सप्ताह में तीन बार भगत की कोठी-दादर सुबह सवा पांच निकलती है। दोपहर एक बजे के करीब अहमदाबाद पहुंचाती है।
ऐसे में वंदे भारत दो घंटे की बचत कर जल्दी पहुंचाएगी।
फिलहाल वंदे भारत जोधपुर से साबरमती एवरेज स्पीड अभी 80 के करीब है। जब इसकी फुल स्पीड 130 में चलेगी तो करीब 3 घंटे पहले पहुंच सकेंगे।
130 की स्पीड के लिए अभी ट्रैक को उस हिसाब से सेट करना होगा। डीआरएम पंकज कुमार सिंह ने बताया कि पूरी ट्रेन एसी है। इसमें माइक्रो प्रोसेसर कंट्रोल है। ड्राइवर के डेस्क पर सीसीटीवी कैमरे होगे। जिससे वे हर कोच पर नजर रखेंगे।
दो कोच के बीच में वेस्ट्यूब लगे हैं। इससे नॉइस कंट्रोल रहेगा। पैंट्री से फूड की सुविधा भी रहेगी। ट्रेन का फ्रंट एयरोडायनामिक शेप में है जो हाईस्पीड के लिए है। यह ट्रेन 160 की स्पीड से दौड़ सकती है।
जोधपुर से साबरमती वंदेभारत के फैक्ट्स
पीएम मोदी आज दिखाएंगे वर्चुअल हरी झंडी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोरखपुर से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से जोधपुर-अहमदाबाद (साबरमती) उद्घाटन स्पेशल रेलसेवा को हरी झण्डी दिखाकर रवाना करेंगे। इस मौके पर राज्यपाल कलराज मिश्र, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वर्चुअल माध्यम से समारोह में जुड़ेंगे।
जोधपुर में आयोजित समारोह में जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत व सांसद (राज्यसभा) राजेन्द्र गहलोत भी उपस्थित रहेंगे।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण ने बताया कि 7 जुलाई को गाड़ी संख्या 02487, जोधपुर- अहमदाबाद (साबरमती) वंदे भारत उद्घाटन स्पेशल रेलसेवा जोधपुर से 15.30 बजे रवाना होकर 22.40 बजे साबरमती पहुंचेगी।
यह रेलसेवा मार्ग में भगत की कोठी, पाली मारवाड़, मारवाड़ जंक्शन,फालना, जवाई बांध, आबूरोड, पालनपुर व महेसाना स्टेशनों पर ठहराव करेगी।
कार्यक्रम के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
PM मोदी ने 15 फरवरी 2019 को पहली वंदे भारत ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी के बीच लॉन्च की थी।
जानिये कैसे बाकी ट्रेनों से अलग है वंदेभारत
ट्रेन का पॉलिटिकल माइलेज
देश की आजादी के बाद बीते 75 साल में 17 बार लोकसभा चुनाव हुए। इस दौरान 15 प्रधानमंत्री बने जबकि 45 रेल मंत्री बने। सिर्फ जगजीवन राम और लालू यादव ही दो ऐसे रेल मंत्री हैं, जिन्होंने अपने 5 साल का टर्म पूरा किया।
रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य विनोद माथुर मानते हैं कि इसकी वजह पूरी तरह पॉलिटिकल है। माथुर का कहना है कि गठबंधन की सरकार बनाने के लिए अक्सर छोटी पार्टियों को रेलवे मिनिस्ट्री ऑफर की जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये आम लोगों से जुड़ा विभाग होता है।
छोटी पार्टियों के नेता लोक-लुभावन रेलवे योजनाओं के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
1981 में रेलवे बोर्ड के जॉइंट डायरेक्टर रहे जे.एल. सिंह कहते हैं कि हर मंत्री अपने क्षेत्र के लिए रेलवे फैक्ट्री, रेलवे लाइन और ट्रेनें चलाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि एक बार अपने पद पर रहते हुए उन्होंने सरकार से 3 रेलवे मेंटेनेंस वर्कशॉप बनाने की अपील की।
देश के पूर्व, पश्चिम और दक्षिणी हिस्से में इसके लिए शहर चुनने का सुझाव दिया गया। हालांकि, रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने तब राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को खुश करने के लिए तिरुपति में एक वर्कशॉप खोलने का फैसला किया। यह एक राजनीतिक फैसला था, लेकिन टेक्निकली पूरी तरह से खराब फैसला था।
इसी तरह 1988 में कांग्रेस सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के 100वें जन्मतिथि पर शताब्दी ट्रेन को चलाने की घोषणा की थी। उस वक्त कांग्रेस सरकार में रेल मंत्री माधवराव सिंधिया थे, उन पर रेलवे को एक पॉलिटिकल टूल के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगा था।
भारत में पटरियों पर दौड़ती हैं 11 हजार से ज्यादा ट्रेनें
दुनिया में चौथा सबसे लंबा रेल नेटवर्क भारत का है। यहां 1.25 लाख किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर हर रोज 11 हजार से ज्यादा ट्रेनें दौड़ती हैं।
इन ट्रेनों के जरिए करीब 3 करोड़ लोग हर रोज सफर करते हैं। इतना बड़ा और लोगों से जुड़ा होने की वजह से भारत में रेलवे का अलग बजट ही पेश किया जाता था। 2016 में मोदी सरकार ने 92 साल पुरानी ये प्रथा बंद की।
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