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"खाकी " निरंतर हो रही शर्मसार। कार्यवाही नहीं हो रही कारगर।। ताजा मामला जालोर जिले के करड़ा पुलिस थाने का देखिये क्या है मामला

"खाकी " निरंतर हो रही शर्मसार।
  कार्यवाही नहीं हो रही कारगर।।

जालोर जिले के करड़ा थाने का थानाधिकारी अर्थात SHO अमरसिंह और हेड कांस्टेबल पर तभा राम मात्र 1 लाख 50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार।
 राजस्थान की भ्रष्ट , अंधी व बहरी तथा व्यभिचारी पुलिस का जो निरंतर चेहरा सामने आ रहा है उसमें करड़ा थाने के SHO जैसे सैकड़ों पुलिसकर्मी है जोकि राजस्थान पुलिस की इस भ्रष्ट कार्यशैली में चार चांद लगा रहे हैं । महत्वपूर्ण यह भी है कि राजस्थान में जितने भी लोक सेवक रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए हैं उनमें से हर तीसरा कार्मिक पुलिस का ही है, अर्थात पुलिस में भ्रष्टाचार व व्यभिचार जो तीव्र गति से बढ़ा है उसका मूल कारण क्या है , समय आ गया है कि सरकार को इस पर गंभीरता से मनन कर निर्णय लेना पड़ेगा ।  

अब रिश्वत भी लाखो में ही मांगी जा रही है। और ऐसा भी नहीं है कि रिश्वत की राशि एसपी तक नहीं जाती हो।

एक तथ्य यह भी उल्लेखनीय है कि मेरे द्वारा मुख्यमंत्री महोदय और पुलिस महानिदेशक को बार-बार यह निवेदन किया जाता है कि पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सतर्कता शाखा को मजबूत किया जाए परन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे द्वारा बार-बार लिखने के बावजूद भी पुलिस की सतर्कता शाखा को मजबूत करने का कोई प्रयास ही नहीं हुआ है ।

 सत्ता में आसीन राजनेताओं को एवं भारी भरकम वेतन लेने वाले ईमानदार नौकरशाही को सोचने व समझने की सख्त आवश्यकता है।

 अब इस तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है कि पुलिस में जो 10 से 20% ईमानदार और कर्मठ अधिकारी हैं उनको भी लोग संशय की नजरों से देखते हैं और वे लोग भी अपनी ईमानदारी को लेकर येन केन प्रकारेण प्रताड़ित होते रहते हैं जो और भी घातक है।

 वास्तव में देखा जाए तो मेरे जैसे एक कार्यकर्ता को पुलिस का हर आदमी जालोर के करड़ा के SHO अमरसिंह जैसा ही दिखाई देता है क्योंकि पुलिस के इस भ्रष्ट सिस्टम में आप किसी भी भ्रष्ट पुलिसकर्मी की कैसी भी शिकायत कर दो कोई कार्यवाही नहीं होती, उल्टे ये खाकी वाले संगठित वर्दीधारी आपराधिक गिरोह की तरह काम करने लग जाते हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि कुए में ही नहीं बल्कि हवा में ही भांग घुलगई है ।।

अभी भी समय है कि मुख्यमंत्री और शीर्ष नौकरशाही मिलकर पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और व्यभिचार को रोकने हेतु एवं ठोस कार्यवाही करें अन्यथा पुलिस में भ्रष्टाचार व व्यभिचार ऐसी तीव्र गति से बढ़ेगा कि लोगो को न्याय मिलना ही बंद हो जाएगा।

इन सबका मूल कारण क्या है , यह देखने का समय आ गया है । कई सारे थाना अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों ने कुछ दलाल पत्रकारों के साथ मिलिभगति कर कुछ ऐसा मेलजोल कर रखा है कि इस भ्रष्टाचार व व्यभिचार को नित नए आयाम मिल रहे हैं । कमाऊ पूत थानाधिकारियो का बाल भी बांका नही होता।

  मैने यह लिखा था कि - समय की मांग है कि सरकार को इस पर गंभीरता से मनन करना चाहिए क्योंकि समय दूर नही जब निरीह प्रताड़ित सरेआम पुलिस अधिकारियों को सड़कों पर ही मारेंगे। मेरी आशंका निर्मूल साबित नहीं हुई है और ऐसी घटनाएं राजस्थान की प्रत्येक जिले में हो रही है।

नंद लाल व्यास
RTI और सामाजिक कार्यकर्ता
जोधपुर

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