चिंतन
जगमालसिंह राजपुरोहित
मोदरान न्यूज
*" सलमान खान ने यदि अपने शरीर के दर्द और थकान की तुलना रैप पीड़ित महिला के शारीरिक दर्द और थकान से कर दी तो इसमे बुराई क्या हे बल्कि भावनात्मक संवेदन शीलता के तोर पर यह तो प्रशंशा की बात हे "*
इलेक्ट्रानिक मिडिया, समाचार पत्र और सब जगह बस एक ही बात सलमान खान की निंदा क्योकि उसने अपने शरीर के दर्द और थकान की तुलना एक रेप पीड़ित महिला के शारीरिक दर्द और थकान से कर दी ।
सब इस तरह रिएक्ट कर रहे हे मानो सलमान ने दर्द की तुलना ना की हो उसने अपने किसी आनंद की तुलना रेप पीड़ित महिला से कर दी हो ।
मेरा कहना हे की ये एक विषय हो सकता हे कि रेप पीड़ित महिला की मानसिक स्थिति और सामाजिक स्थिति काफी बुरी हो सकती हे पर यहाँ तो सलमान ने सिर्फ अपने शरीर के थकान और दर्द की तुलना रेप पीड़ित महिला से की हे । सलमान का कहना था की जब वह फ़िल्म की शूटिंग के दौरान 120 किलो वजनी आदमी को 10 तरह से 10 बार उठाता था और फिर बार बार रीटेक की स्थिति बनती थी तो शूटिंग के बाद वह इतना थक जाता था और उसके शरीर में इतना दर्द होता था की वह इस तरह महसूस करता था जैसे कोई बलात्कार से पीड़ित महिला करती होगी ।
मुझे तो लगता हे की सलमान खान की तारीफ की जानी चाहिए की वह यह तो सोचता हे की बलात्कार से पीड़ित महिला को भी शारीरिक रूप से काफी कस्ट होता हे ।
अब किसका कस्ट ज्यादा और किसका कम हे ये एक बहस का मुद्दा हो सकता हे पर निंदा का विषय कतई नहीं ।
क्या मेरी सोच सही हे ?
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