Ticker

6/recent/ticker-posts

मोदरान : आटा-साटा विवाद में दोहरा हत्याकांड, दो आरोपियों को फांसी और ₹10 लाख का जुर्माना

मोदरान : आटा-साटा विवाद में दोहरा हत्याकांड, दो आरोपियों को फांसी और ₹10 लाख का जुर्माना

जगमालसिंह राजपुरोहित मोदरान 
मोदरान जालोर जिले के भीनमाल अपर सत्र न्यायालय ने रामसीन थाना क्षेत्र के मोदरान गाँव में 3 अप्रैल 2023 को हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायाधीश राजेंद्र साहू ने आरोपी डूंगरसिंह राजपुत और पहाड़सिंह राजपुत दोनों को मृत्युदंड (फांसी की सज़ा) सुनाई है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने दोनों पर 10 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है।
मुतक हरी सिंह राठौड़ 
न्यायालय ने इस जघन्य वारदात को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' श्रेणी का मानते हुए मृत्युदंड का आदेश दिया है।

 'आटा-साटा' विवाद ने ली दो जानें
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, यह खूनी संघर्ष 2023 में एक पारिवारिक विवाद के कारण हुआ था।
विवाद का मूल: आरोपी डूंगरसिंह राजपुत और पहाड़सिंह राजपुत दोनों अविवाहित थे और विवाह की मांग को लेकर अपने बड़े भाई रतनसिंह  राजपुत पर लगातार दबाव बना रहे थे। उनकी अधिक उम्र, बेरोजगारी और राजपूत समाज में प्रचलित 'आटा-साटा' प्रथा के कारण उनका विवाह तय नहीं हो पा रहा था।
प्रतिशोध: जब रतनसिंह  ने अपनी बेटी रिंकू कंवर को 'साटे' में देने से इनकार कर दिया, तो दोनों भाइयों ने उनसे रंजिश पाल ली।
वारदात: इसी प्रतिशोध में 3 अप्रैल 2023 की शाम को, दोनों आरोपियों ने कुल्हाड़ियों से हमला कर अपनी सगी भाभी इंद्रा कंवर की बेरहमी से हत्या कर दी।
दूसरी हत्या: घटना रोकने आए पड़ोसी हरिसिंह राठौड़ (अध्यक्ष, श्री आशापुरी माताजी रेल संघर्ष समिति )को भी कुल्हाड़ी से मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। हमले के दौरान बीच-बचाव करने आई भतीजी रिंकू कंवर और भतीजे जसवंतसिंह पर भी हमला किया गया था।

 पुलिस और कोर्ट मुंशी का रहा विशेष योगदान
मामले की जांच और न्यायिक कार्रवाई में पुलिस और कोर्ट कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।
जांच: तत्कालीन और वर्तमान थानाध्यक्ष व केस ऑफिसर अरविंद सिंह राजपुरोहित ने इस मामले की जांच मात्र 56 दिनों में पूरी कर दी। उन्होंने वैज्ञानिक विश्लेषण और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
संघर्ष: जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो आरोपियों ने उनका भी प्रतिरोध किया, जिसमें पुलिसकर्मी एएसआई सुरेंद्रसिंह राव घायल हो गए थे।
कोर्ट मुंशी की भूमिका: न्यायिक कार्रवाई को गति प्रदान करने में कोर्ट मुंशी अशोक कुमार का विशेष योगदान रहा। न्यायालय ने उनकी सतर्कता और दस्तावेज़ प्रबंधन की सराहना की।

न्याय मिलने पर पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया
फैसला सुनाए जाने के बाद, मृतका इंद्रा कंवर के पिता और हरिसिंह राठौड़ की पत्नी की आँखों में नमी थी।
परिवादी पक्ष से अधिवक्ता पृथ्वीसिंह ने प्रभावी पैरवी की थी। इंद्रा कंवर के बुजुर्ग पिता और मृतक हरिसिंह की पत्नी ने कहा, "अब मेरे पति और इंद्रा की आत्मा को शांति मिलेगी। अब उसे मोक्ष मिलेगा।"
हरिसिंह राठौड़ की पत्नी की आवाज कांप रही थी, लेकिन उनके शब्दों में वर्षों का दर्द और न्याय मिलने की संतुष्टि साफ झलक रही थी। उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि, "मेरी विवाहित बेटी और मेरे पति को जिस निर्दयी तरीके से मौत के घाट उतारा गया, उस दर्द ने हमारी पूरी जिंदगी तबाह कर दी। ढाई साल से हम हर दिन न्याय की उम्मीद में रोते रहे और ये दोनों मुलजिम जेल में आराम से रोटियां तोड़ते रहे। लेकिन आज हिंदुस्तान की निष्पक्ष न्यायपालिका ने हमारी पुकार सुनी।"
कोर्ट के इस निर्णय से क्षेत्र में कानून एवं न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ