मोदरान : मां को आशापुरी नाम से क्यु पूजते है जाने ?
By- jj MODRAN NEWS
मोदरान - February 4, 2018022
मोदरान न्यूज.
जालोर जिले में सभी धर्म, सम्प्रदायों, समुदायों आदि के धार्मिक स्थलों की भरमार हैं। जिसमें मोदरा का श्री आशापुरी माताजी का मंदिर अपनी विशिष्ट धार्मिक पहचान के लिए जन-जन में केवल लोकप्रिय ही नहीं अपितु अपार आस्था एवं विश्वास का पूजनीय स्थल बनता हुआ, पवित्र तीर्थ धाम के रूप में दिनोंदिन सभी जातियों, धर्मों, समुदाय के लोगों में लोकप्रिय बनता जा रहा है। यहां प्रतिवर्ष हजारों-हजारों यात्री देश के विभिन्न क्षेत्रों से मोदरा की श्री आशापुरी माताजी के दर्शन करने आते रहते हैं। विशेषकर यहां के हिंदुओं के पवित्र होली त्यौहार के तीसरे दिन आयोजित मेले में भाग लेने के लिए अपार जनसमुदाय एकत्रित होता है।
राजस्थान में धार्मिक केंद्रो की भरमार :
राजस्थान प्रदेश की वीर प्रसविनी भूमि अपने शौर्य एवं पराक्रम, त्याग एवं बलिदान के लिए विश्वविख्यात है। जिसकी पावन गोद में साहित्य, कला एवं संस्कृति का समृद्धशाली विकास एवं विस्तार हुआ है। इस कारण राजस्थान की इस पावन धरा पर विभिन्न सम्प्रदायों के एक से एक बढ़कर पवित्र एवं पूजनीय तीर्थ एवं धार्मिक स्थल विद्यमान है। जिसकी धार्मिक सहिष्णुता जगजाहिर है। यहां की विभिन्न धर्मों की धार्मिक एकता, मान, सम्मान, आदर, सत्कार के कारण इस माटी की गौरव गरिमा विश्व पटल पर पहचानी जाती है। लोकप्रिय संत महात्माओं और त्यागी तपस्वियों, वैरागी साधु संतों की यहां भरमार रही हैं। जिन्होंने इस माटी में जन्म लेकर अपनी धार्मिक कीर्ति बढ़ाई। यहां की धरती को अपनी साधना, आराधना, तपस्या आदि की कर्म भूमि बनाकर न केवल राजस्थान का अपितु अपनी ज्ञान गरिमा, तप साधना, भक्ति भावना, धर्म के प्रति अटूट आस्था एवं विश्वास से जगत को मार्गदर्शन दिया है। इन सबसे अधिक प्रेरणा के पुंज यहां के धार्मिक स्थल है। जिनकी छत्र छाया में बैठकर इंसान ने सत्यपथ की ओर अग्रसर होकर अपने आत्म कल्याण के साथ मानव सेवा करने को प्रेरित होकर प्रेरणा प्राप्त की है और निरन्तर प्राप्त कर रहे हैं। ये ही हमारी धार्मिक आस्था एवं विश्वास के केन्द्र हमारी कमियों, हमारी दुविधाओं, हमारे संकट-विकट, हमारे दुख-दर्द आदि भीषण विपदाओं को दूर कर हमारे जीवन में नई आशा की किरण उत्पन्न कर रहे हैं। ऐसे धार्मिक स्थल पूरे देश के साथ सम्पूर्ण राजस्थान में फैले हुए हैं। जिसके प्रति अपार जनसमुदाय की अघाट आस्था जुड़ी हुई हैं। इस कारण राजस्थान का कण-कण धार्मिक दृष्टिड्ढकोण से पवित्र एवं पूजनीय बना हुआ है।
धार्मिक सहिष्णुता एवं बंधुत्व की भावना और आपसी स्नेह व प्यार वाले राजस्थान प्रदेश का जालोर जिला भी अपने उत्कृष्ट साहित्य, कला व संस्कृति के लिए विख्यात है। जिसका अपना गौरवशाली वीरोचित इतिहास रहा है। यहां के शूरमाओं ने अपनी मातृभूमि एवं स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग करना अपना धर्म एवं कत्र्तव्य समझा। वहां इसकी गोद में जन्म लेकर साधना करने वाले संत महात्माओं की यहां कमी नहीं रही है। जिन्होंने अपने धार्मिक क्रियाकलापों से इस क्षेत्र की मान-मर्यादा बनाये रखी है। यहां त्यागी तपस्वियों ने अपने त्यागपूर्ण जीवन से इस क्षेत्र की गौरव गरिमा भी बढ़ाई है। यहां के धर्म प्रेमियों ने कई धार्मिक स्थलों का निर्माण कर यहां के प्राचीन इतिहास को जीवित रखने का अनोखा एवं अद्ड्ढभुत प्रयास किया हैं। यहां के कुशल शिल्पकारों ने एक से एक बढ़कर धार्मिक स्थलों को अपनी छैनी हथोड़े के सहारे चित्त आकर्षक स्वरूप प्रदान कर प्राचीन शिल्पकला को सुरक्षित रखने का अथक प्रयास एवं प्रयत्न किया है। जिसके कारण इस क्षेत्र की प्राचीन पुरातन संबंधी पहचान एवं परख बनी हुई है। हमारे ये ही धार्मिक स्थल आज हमारी अमूल्य धरोहर बनकर हमारे जीवन में नई आशा की किरण का संचार करते हुए आत्म कल्याण करने की ओर प्रेरित करते हैं।
मन्नत पुरी करती है मां भक्तों की :
श्री आशापुरा माताजी के दर्शन करने आने वाले यात्री माताजी से अपनी आशाओं की पूर्ति के साथ जीवन में सुख एवं समृद्धि की मनोकामना करते हुए प्रसादी चढ़ाकर अपने आपको भाग्यशाली समझते हैं। मोदरा की श्री आशापुरी माताजी की कई नामों से पहचान है। मोदरा में इनका मंदिर होने के कारण वर्तमान में इसे मोदरा माताजी के नाम से भी जानते हैं। प्राचीन समय में महोदरा वर्तमान मोदरा स्थल के नाम से परिचायक रहा है, इस कारण महोदरी माताजी के नाम से भी इनकी पहचान है।
पटरानी शीतल सोलंकाणी की पुत्र प्राप्ति की आशा को पूर्ण करने पर आशापुरी कहलाई मां :
माताजी ने महिषासुर का मर्दन किया था, इस कारण इन्हें महिषासुरमर्दनी के नाम से विशेष रूप से पुकारा जाता है। मोदरा माता, महोदरी माता के नाम से पहचान है वहां माताजी के देवी चमत्कारों से अब मोदरा को माताजी का गांव से ही लोग आसानी से पहचान जाते हैं। माताजी का गांव का उच्चारण करते ही लोग समझ जाते हैं कि यह मोदरा ही है जहां ऊंचे शिखर वाला श्री आशापुरी माताजी का भव्य मंदिर बना हुआ है।
धार्मिक भाव से जुड़ा आस्था का केंद्र :
मोदरा राजस्थान प्रदेश के जालोर जिले की भीनमाल तहसील एवं जसवंतपुरा पंचायत समिति का धार्मिक दृष्टि से विख्यात गांव हैं जो जोधपुर से भीलड़ी रेलमार्ग पर मोदरा रेलवे स्टेशन के रूप में आया हुआ है। मोदरा रेलवे स्टेशन से करीबन एक किलोमीटर दूर मोदरा गांव स्थित है। उसी गांव में रेलवे पटरी के पास ही मोदरा श्री आशापुरी माताजी का मंदिर आया हुआ है। माताजी के इस धार्मिक स्थल तक पहुंचने के लिए रेल एवं बस यातायात की समुचित व्यवस्था है। मोदरा एवं मोदरा की आशापुरी माताजी मंदिर तक विभिन्न स्थानों से बसों एवं निजी वाहनों से आसानी एवं सुगमता के साथ पहुंचा जा सकता है। श्री मोदरा आशापुरी माताजी के मंदिर आदि की सम्पूर्ण देखभाल करने के लिए श्री आशापुरी माताजी ट्रस्ट कमेटी, मोदरा (जिला-जालोर, राज.) का गठन किया हुआ है। इसके अन्तर्गत श्री आशापुरी माताजी तीर्थ पेढ़ी (कार्यालय) व्यवस्थित रूप से कार्यरत है। यह पेढ़ी कार्यालय मंदिर के नीचे आधुनिक साधन सुविधाओं से परिपूर्ण है। ट्रस्ट के पदाधिकारी तथा ट्रस्टी पूर्ण मेहनत से ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को अंजाम दे रहे है। अब तो विभिन्न जातियों की तरफ से यात्रियों के ठहरने के लिए धर्मशालाओं का निर्माण भी होने लगा है। श्री आशापुरी माताजी ट्रस्ट कमेटी, मोदरा पंजीयन संस्था है।
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