जालोर जिले के बासडाधनजी क्षैत्र में
नशे की लत में बर्बाद हो रही युवा पीढी
जगमालसिंह राजपुरोहित
मोदरान । स्थानीय रेलवे स्टेशन, मोदरान गांव सहित बालडाधनजी, सेरना व धानसा क्षैत्र में ईन दिनों युवा वर्ग नशे की चपेट में बहुत तेजी के बढ रहा है स्कूल व कॉलेज में पढने वाले बच्चे पर भी आजकल गांजा व स्मेक का नशा न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक दुष्प्रभाव डाल रहा है।
नशे की पूर्ति के लिए ये युवा अपराध से भी नही हिचक रहे हैं।
सबसे बडी बात तो ये है की क्षैत्र स्मेक ,गांजा ,अफीम व शराब हर क्षैत्र में आसानी से कैसे उपलब्ध कराया जा रहा है यह तो प्रशासन को जानना ज़रूरी है।
क्षैत्र में नशे के कारण सबसे अधिक प्रभावित युवा वर्ग है। इससे उनका मानसिक संतुलन खराब हो रहा है। एक बार नशे की लत में पड़ने के बाद इससे निकलना बडा मुश्किल हो रहा है।
युवा वर्ग इस स्मेक एमडी व नशीली दवाइयों की लत में इस कदर डूब रहा है कि इसके दुष्परिणाम के बारे में नहीं सोचा जा सकता हैं। इसमें छोटे-छोटे नौ जवान भी शामिल हैं।
नशे की लत में सबसे अधिक 16 साल से लगाकर 30 , 35 वर्ष तक के लड़के शामिल हैं।
इसकी शुरूआत पान गुटखा, तंबाकू,सिगरेट आदि से हो रही है।
इसके अलावा नशे के लिए सस्ते प्रोडक्ट व्हाइटनर, बोनफिक्स को भी झिल्ली में भरकर इसे नाक-मुंह से खींचकर नशापूर्ति का खूब इस्तेमाल हो रहा है।
तंबाकू, शराब, दवा से नशे के लत की हुई शुरूआत बढ़कर स्मैक ,कोकीन, मार्फिन तथा हेरोइन तक पहुंच रही है।
बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति
गलत नचा करना अपराध लेकिन नशे की लत को पूरी करने के लिए बच्चे अपराध करने से भी नहीं हिचक रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में आये दिन हो रही चोरी,जारी व अन्य अपराध में मुख्य रूप से युवा ही शामिल हो रहे हैं।
यही नहीं रेलवे स्टेशन के आसपास घूमने वाले बच्चे चलती ट्रेन में भी वारदात करने से नहीं चूकते। नशे की लत इन पर हावी हो जाती है तो वह इसकी पूर्ति के लिए किसी की कोई भी गलत काम करने से भी से भी परहेज नहीं करते।
स्मैक, अफीम ओर गांजा बहुत आसानी से उपलब्ध कराया जारहा है पुलिस की कोई कार्रवाई न होने से इसका प्रचलन बढ़ता जा रहा है ।
स्मैक पीना बनता जारहा है फैशन ।
हमारे समाज में नशे को सदा बुराइयों का प्रतीक माना और क्षैत्र रात को 12 बजे बजे तक शराबी व यह नशेड़ी घूमते है गाँवो में जिससे आम लोगो को घर से बार निकलना मुश्किल होता है लोगो को गाली गलौज तक भी उतारु होते है जिससे लोगो परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन आजकल नशा यानी स्मैक, शराब पीना फैशन बनता जा रहा है। जबकि शराब को सभी बुराइयों का जड़ माना गया है। शराब के सेवन से मानव के विवेक के साथ सोचने समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है। वह अपने हित-अहित और भले-बुरे का अंतर नहीं समझ पाता।
इस पर गांधीजी की एक बात याद आती है कि शराब के सेवन से मनुष्य के शरीर और बुद्धि के साथ-साथ आत्मा का भी नाश हो जाता है। शराबी अनेक बीमारियों से ग्रसित हो जाता है।
क्षेत्र में स्मैक, गांजा व अफीम मिलना आम बात ।
स्मैक, व अफीम खाने वाले सबसे अधिक कही अफीम बीमारियों से परेशान हैं। बड़े तो इसके शौकीन हैं ही बच्चे भी इससे अछूते नहीं हैं। अफीम ग्रसित हो रहे हैं। वहीं गांव में अफीम व गांजा पीने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि हर जगह अफीम व गांजा मिल रहा है इस पर रोकथाम के लिए प्रशासन सुस्त नजर आ रहा है।
आदत में बदल जाता है शौक ।
नशे की चपेट में किशोर और युवा बहुत तेजी से आ रहे हैं। इसको बढ़ावा देने में हिन्दी सिनेमा और टीवी बहुत हद तक जिम्मेदार है। फिल्मी हीरो को धुंए का छल्ला उड़ाता देख उनके अंदर भी हीरो बनने की इच्छा होती है। शुरुआत तो नासमझी के कारण होती है, जो आगे जाकर लत बनती जा रही है। यह आदत कमजोरी में तब्दील होती जारही है ।
दिमागी बीमारियों का भी खतरा
क्षैत्र के चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि तंबाकू व स्मेैक के सेवन से मुंह, गले के कैंसर के अलावा फेफड़े पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इसके चलते मुंह में हमेशा छाले बने रहते हैं।
जानकारी दी की नशीली दवाओं के सेवन से शरीर के स्वास्थ्य के साथ दिमागी बीमारियां भी होती हैं। जिस कारण यह लोग कभी भी अपराध करने में भी नहीं हिचकी चाते है।
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