भीनमाल / मोदरान:
भीनमाल के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) न्यायालय ने एक बहुचर्चित और हृदयविदारक दोहरे हत्याकांड के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दो सगे आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें मृत्युदंड (फांसी की सज़ा) की सजा सुनाई है, जिससे क्षेत्र में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
🩸 क्या था पूरा मामला?
यह जघन्य वारदात रामसीन थाना क्षेत्र की मोदरान पुलिस चौकी इलाके की है। जानकारी के अनुसार, इस दोहरे हत्याकांड का मूल कारण 'आटा-साटा' प्रथा से जुड़ा विवाद था।
घटना वाले दिन, आरोपी डूंगरसिंह राजपुत और पहाड़सिंह राजपुत ने मिलकर खूनी खेल खेला। उन्होंने न केवल अपनी भाभी इंद्रा कंवर की निर्मम हत्या कर दी, बल्कि बीच-बचाव करने आए हरिसिंह राठौड़ नामक एक अन्य व्यक्ति को भी मौत के घाट उतार दिया। यह क्रूरता आटा-साटा के तहत हुए पारिवारिक विवाद का हिंसक अंत थी।
🏛️ न्यायालय की कार्रवाई और फैसला
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और मजबूत साक्ष्यों के साथ न्यायालय में चार्जशीट पेश की। एडीजे कोर्ट भीनमाल में चले लंबे ट्रायल के दौरान, अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए, जिससे यह साबित हो सका कि दोनों आरोपियों ने जानबूझकर और क्रूरतापूर्ण तरीके से दो लोगों की हत्या की थी।
न्यायाधीश महोदय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, साक्ष्यों का अवलोकन करने और अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' (विरलतम से विरल) की श्रेणी का मामला माना।
सज़ा: कोर्ट ने आरोपी डूंगरसिंह और पहाड़सिंह को फांसी की सज़ा सुनाई।
✅ पुलिस और अभियोजन पक्ष की सफलता
कोर्ट के इस फैसले पर पुलिस और अभियोजन पक्ष ने संतुष्टि जाहिर की है। उन्होंने इस मामले में त्वरित जांच और प्रभावी पैरवी को एक बड़ी सफलता बताया।
"यह फैसला दिखाता है कि क्रूरतम अपराध करने वालों को कानून किसी भी हाल में नहीं बख्शेगा। न्यायपालिका ने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया है," अभियोजन अधिकारी ने कहा।
इस ऐतिहासिक निर्णय ने 'आटा-साटा' जैसी सामाजिक कुरीतियों से जुड़े विवादों को हिंसक तरीके से हल करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश दिया है।
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